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मंगलवार, 17 नवंबर 2009

तू इस अंधकार से निकल




ये छोटी सी मेरी कविता मेरी भावनाओं पर
आधारित....कैसी लगी जरूर बतायें ....

मेरा-तेरा ,जात-पात,
धर्म-अधर्म सब है मिथ्या
तू इस अंधकार से निकल ,

क्या लाया था और क्या ले जायेगा तू
सत्य को पहचान .
यह जग ही है
अंधकार का ज्ञान ,

इंसानों अब रुक जा तू
धन, दौलत, माकन ,
ये सब है
मिथ्या का शान ,

कुछ भी नहीं है तेरा
रिस्ते साथी दोस्त
सब छोर चलेंगे एक दिन

इंसानों ....
सत्य को पहचानो
छोर ! इस जग का माया जाल
कर तू ज्ञान और भक्ति का दान

सब जानते हुए भी
फिर क्यों ?
बना हुआ है तू अंजान !!!!!!

.......साधना




अगर हिंदी कि वर्तनी में कोई गलती हो तो उसके लिए क्षमा चाहती हूँ क्यों कि यहाँ हिंदी टाइपिंग में थोरी मुश्किल होती हैं ....


8 टिप्पणियाँ:

SACCHAI ने कहा…

" bahut hi sundar rachana ..aapne to GEETA ka meaning bahut hi saral sabdo me bata diya ."

" aapko dhero badhai "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

रश्मि प्रभा... ने कहा…

सत्य की पहचान के लिए तुम्हारे क़दमों में जबरदस्त दृढ़ता है ........

कुश ने कहा…

उम्दा लिखावट है..

mark rai ने कहा…

कुछ भी नहीं है तेरा
रिस्ते साथी दोस्त
सब छोर चलेंगे एक दिन.........
bahut hi achcha .......inspirational...

KAVITA RAWAT ने कहा…

रिस्ते साथी दोस्त
सब छोर चलेंगे एक दिन.........
Sahi baat hai ek matra shaswat satya to yahi hai ki sabkuch dhara ka dhara rah jaata hai yahan par iske liye dekhiye aadmi kya-kya nahi kar jata.... yahi bidambana hai ....
Shubhkamnayen

Harkirat Haqeer ने कहा…

ऐ इंसानों ....
सत्य को पहचानो
छोर ! इस जग का माया जाल
कर तू ज्ञान और भक्ति का दान

सत्य से रूबरू कराती पंक्तियाँ ......!!

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

सुंदर कविता...... साधुवाद....

VIKAS ने कहा…

kuch karna chahte ho toh kuch naya aur accha likho aisi bakwaas me 20 salo se sun raha hu pls ! naya karo yaar koi bhi nayi aur badi baat nahi hai isme ! nahi toh bhatakte raho andhkar me

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