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रविवार, 30 जनवरी 2011

क्या तुम्हे पता है .... ?


देखा तुझे तो ऐसा लगा
तुम से भी खूबसूरत
तुम्हारा अंदाज़ है !
कहते हो सम्भालो
कैसे सम्भालूँ मैं ,
अब ,तुम ही बता दो ?
इसी अदा पे तो मर-मिटी थी मैं
यही तो ,सदियों पुराना राज़ है..
क्या तुम्हे पता है .... ?

साधना ::---:

19 टिप्पणियाँ:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut sundar

sada ने कहा…

बेहतरीन ।

राकेश कौशिक ने कहा…

आकर्षक शीर्षक, मनमोहक ब्लॉग और प्रशंसनीय प्रस्तुति - बधाई

डॉ० डंडा लखनवी ने कहा…

अति सुन्दर कलाम! नव लेखन को प्रणाम एवं बधाई!
कृपया बसंत पर एक दोहा पढ़िए......
==============================
शहरीपन ज्यों-ज्यों बढ़ा, हुआ वनों का अंत।
गमलों में बैठा मिला, सिकुड़ा हुआ बसंत॥
सद्भावी - डॉ० डंडा लखनवी

amar jeet ने कहा…

अच्छी सुंदर रचना
बसंत पंचमी की शुभकामनाये

Sawai Singh Raj. ने कहा…

आपकी रचना वाकई तारीफ के काबिल है

Bhushan ने कहा…

इसी अदा पे तो मर-मिटी थी मैं
यही तो ,सदियों पुराना राज़ है..
क्या तुम्हे पता है .... ?
waah kya ada hai...badiya hai ji

amrendra "amar" ने कहा…

Waah Sunder rachna......aur blog bhi bahut sunder hai

Dinesh pareek ने कहा…

शुभकामना है कि आपका ये प्रयास सफलता के नित नये कीर्तिमान स्थापित करे । धन्यवाद...
आपका ब्लॉग अच्छा है |

आप मेरे ब्लाग पर भी पधारें व अपने अमूल्य सुझावों से मेरा मार्गदर्शऩ व उत्साहवर्द्धऩ करें, ऐसी कामना है । मेरे ब्लाग जो अभी आपके देखने में न आ पाये होंगे अतः उनका URL मैं नीचे दे रहा हूँ । जब भी आपको समय मिल सके आप यहाँ अवश्य विजीट करें-
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सारा सच ने कहा…

अच्छे है आपके विचार, ओरो के ब्लॉग को follow करके या कमेन्ट देकर उनका होसला बढाए ....

RAMESH SHARMA ने कहा…

Bahoot Khoob Likhti Hai aap....

RAMESH SHARMA ने कहा…

Bahoot Khoob Likhti Hai aap....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) ने कहा…

कल 14/02/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

vandana ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर

Madhuresh ने कहा…

बहुत खूब!

Rewa ने कहा…

wah....very nicee lines...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

behtarin...sambhalna muskil hai sadar badhayee aaur amantran ke sath

Reena Maurya ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना...

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